जनता की अदलात में एक बार फिर वो घोटाले बाज़ नेता वोट मांगते नज़र आ रहे है जिन के दवरा उत्तराखडं का विकास तो नहीं किया गया लेकिन खुद का विकास कर के करोड़ पति जरूर बन लिया गया जिन की घोसित सम्पत्ति कई गुना बड़ गयी और आम बाग़ से लेकर उत्तराखडं की जल जंगल व जमीनो को बेच कर अपनी दौलत कई गुना बढ़ा ली मतदान करने से पहले उन नेताओ से ये जरूर पूछ लेना की ये करोड़ो की दौलत कहा से आई क्यों की जब कोई काम धाम नहीं है तो ये कमीशन किस घोटाले की है और खास कर टेहरी की जनता को ये बात जरूर अपने यहाँ आ रहे नेता से पूछनी चाहिये
आइये एक साथ बैठे , मिलकर कुछ चर्चा करे .... ब्लोगिंग को एक नई पहचान दे । ब्लोगिंग केवल शब्दों का खेल भर नही है ..... आइये कुछ जानकारी भी हासिल करे । खोजी प्रवृति के लोगों का दिल से स्वागत है ....
Friday, April 18, 2014
Monday, March 10, 2014
जैविक पिता के प्रोकॉप से बचने के लिए उस सीट पर चुनाव लड़ने से किनारा
उत्तराखंड में लोकसभा टिकटो को लेकर भाजपा में जहा महा सग्राम जारी है वही एक लोकसभा सीट से दावेदार के खिलाफ टिकट फाइनल होने पर बबाल मच सकता है जैविक पिता का आरोप लगनें वाली महिला डीएनए जाच कि माग को लेकर फिर से सामने आ सकती है पूर्व में आरोप को लेकर मामला कोर्ट तक पंहुचा था लेकिन मामले पर कुछ नहीं हो पाया था लेकिन भाजपा में टिकट फाइनल होने के बाद बबाल मचना तय है जिस के चलते भाजपा भी इस सीट पर टिकट को लेकर फुक फुक कर कदम रख रही है इस सीट पर उत्तराखंड के एक बड़े नेता के परिवार से भी चुनाव लड़ने को लेकर तैयारिया पूरी कर ली गयी है मना जा रहा है भाजपा के नेता जैविक पिता के प्रोकॉप से बचने के लिए उस सीट पर चुनाव लड़ने से किनारा कर सकते है
Sunday, October 13, 2013
मीडिया की दुर्दषा पर आंसू बहाता उत्तराखण्ड का खंडर में तब्दील प्रैस क्लब।
देहरादून। पत्रकारिता का चैथा स्तम्भ दूसरो को आइना दिखाने की कोषिष लेकिन खुद आपसी लड़ाई के चलते वर्शो से खन्डर में तब्दील प्रैस क्लब की दुर्दषा बयां कर रही है कि मीडिया की हकीकत किसी से छुपी नहीं। दूसरो को आइना दिखाने की नसीहत देने वालो को खुद खन्डर में तब्दील हो चुका देहरादून का उत्तरांचल प्रैस क्लब अपनी कहानी खुद ही बयां कर रहा है। देषभर के विभिन्न राज्यो में प्रैस क्लब मीडिया के लिए जहां सषक्त माध्यम होता है वहीं सुख दुख की बातो का आदान प्रदान भी इसी प्रैस क्लब के माध्यम से अपनी भूमिका निभाकर पत्रकारो के बीच सेतु का काम करता है लेकिन उत्तराखण्ड के देहरादून में स्थित प्रैस क्लब को वर्चस्व की लड़ाई ने खन्डर में तब्दील कर दिया है और देष का पहला प्रैस क्बल देहरादून में मौजूद है जो खन्डर में तब्दील होता दिख रहा है। षायद ही देष के किसी अन्य राज्य में प्रैस क्लब विवादित होने के बाद बन्द हुआ हो। इसे दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि जिस प्रैस क्लब में रोजाना सामाजिक, राजनैतिक, सांस्कृतिक गतिविधियो के साथ पत्रकारो की आवाज को बुलन्द करने की सषक्त पहल की गई थी आज वो खुद अपनी बर्बादी पर खन्डर के रूप में मौजूद होकर अपनी कहानी को बयां कर रहा है। पत्रकारो के देहरादून में एकमात्र प्रैस क्लब की दुर्दषा के लिए कौन जिम्मेदार हैं इसका आत्म मंथन उन्हें स्वयं करना होगा जो पत्रकारिता को एक मिसाल के तौर पर कायम कर अपना सिक्का षासन प्रषासन में होने का डंका बजाते हैं लेकिन उनका यह डंका उन्ही के प्रैस क्लब ना खुल पाने पर हकीकत को भी बयां कर देता है और मीडिया की कुंद होती धार को हकीकत के रूप् में सामने ला देता है। उत्तरांचल प्रैस क्लब परेड के पास स्थित उस समय विवादित हो गया था जब प्रैस क्लब के तत्कालीन अध्यक्ष योगेष भट्ट के खिलाफ समूचे बोर्ड ने मोर्चा खोल दिया था जिसके बाद पत्रकारो की कई यूनियनो के नेताओ ने इस मामले को सुलह कराने के कई प्रयास किए लेकिन मामला कोर्ट में चले जाने के कारण प्रषासन को मजबूरन अपनी सरकारी सील प्रैस क्लब में लगाने पर मजबूर होना पड़ा जिसके बाद से प्रैस क्लब सरकारी सील में ही अपनी विरासत को जो वहां मेहनत से जोड़ी गई थी दम तोड़ता नजर आया लेकिन किसी भी पत्रकारो के संगठन ने प्रैस क्लब को खुलवाने के कलिए अपनी कोषिष जारी नही रखी, षायद यहां भी अहम की लड़ाई आड़े आई और दूसरो के सामने षेख चिल्ली बनने वाले पत्रकारो की जमात के नेता प्रैस क्लब को खुलवाने के लिए अपनी ताकत का एहसास कराने में नाकामयाब साबित हुए जिसका नतीजा यह रहा कि कई सालो से बंद पड़ा प्रैस क्लब अपनी विरासत को दीमक की तरह चट करता नजर आया और यहां स्थापित स्व0 हेमवती नंदन बहुगुणा का पुस्तकालय भी पूरी तरह खंडर में तब्दील हो गया और प्रैस क्लब की एकमात्र कैन्टीन जो उज्जवल रैस्टोरैन्ट के नाम से स्थापित थी उस पर भी कब्जा जमा लिया गया जो आज तक बरकरार है। प्रैस क्लब में पत्रकारो की आपसी लड़ाई का फज्ञयदा षासन प्रषासन के अधिकारियो ने भी जमकर उठाया और इसीलिए प्रैस क्लब को खोले जाने के प्रयास अधिकारियो की तरफ से भी नही किए गए। अब चर्चा एक बार फिर षुरू हुई है कि प्रैस क्लब को खुलवाया जाना चाहिए। इसके लिए बकायदा पत्रकारो के सभी संगठन बंद हुए प्रैस क्लब को खुलवाने के लिए हामी भरते नजर आ रहे हैं और बीते दिनो प्रैस क्लब को खुलवाने की मुहिम पत्रकारो के एक यूनियन के नेताओ ने भी षुरू की जिसके सकारात्मक प्रषस प्रभावी रहे तो जल्द ही खंडर में तब्दील हो चुका प्रैस क्लब फिर से गुलजार नजर आएगा। बताया जा रहा प्रैस क्लब की इस बेषकीमती जमीन पर सरकार की नजर भी लगातार बनी हुई है और इस जगह पर काॅम्प्लैक्स बनाने की रणनीति को भी अंजाम दिया जा रहा है। समय रहते यदि पत्रकारो के संगठनो ने खंडर में तब्दील हो चुके प्रैस क्लब को नहीं खुलवाया तो उनके हाथ से प्रैस क्लब की जमीन भी जाती हुई दिख जाएगी।
Tuesday, August 13, 2013
सूचना विभाग में किसके इषारे पर विज्ञापन घोटाले की बू...!!
तो क्या विज्ञापन एजेन्सी विभाग में सूचीबद्व नहीं... तो किसी कृपा से जारी किए विज्ञापन...?
देहरादून। उत्तराखण्ड के सूचना विभाग का विवादित चेहरा हमेषा बरकरार रहा है। विभाग में अधिकारियो की आपसी लड़ाई हो या फिर समाचार पत्रो को विज्ञापन देने का खेल, सभी मामालो में विभाग के विवादित चेहरे हमेषा ही सरकार की किरकिरी कराते रहे हैं। आपदा के दौरान मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की किरकिरी कराने वाले पूर्व डीजी विनोद षर्मा को विभाग से हटा दिया गया था और इसकी गाज सूचना विभाग के अपर निदेषक अनिल चंदोला पर भी गिरी थी, चंदोला को सूचना निदेषालय से हटाकर हल्द्वानी के मीडिया सैंटर में तबादला कर भेज दिया गया था लेकिन इसके बाद भी सूचना विभाग में विज्ञापनो का खेल थमने का नाम नही ले रहा। चहेते टीवी चैनलो को मनमांगे रेट पर विज्ञापन जारी किए जा रहे हैं और सरकार को करोड़ो का चूना लगाकर धन की हानि की जा रही ळै इतना ही नही कई इलैक्टाॅनिक चैनलो को सीधे विज्ञापन जारी किए गए हैं जबकि कुछ को एजेन्सी के द्वारा विज्ञापन का खेल खेलकर कमीषन की लूट सूचना विभाग में अभी भी बेरोकटोक जारी है। इस बात का पता तब चला जब कुछ इलैक्टाॅनिक चैनलो को सीधे विज्ञापन के रूप में दस मिनट का विज्ञापन पचास हजार रूप्ए प्रति दस सैकेन्ड के हिसाब से एक दिन में दो बार जारी किया गया लेकिन कुछ चैनलो को यह विज्ञापन उर्धवा एडवर्टटाइजिंग एजेन्सी के माध्यम से जारी किया गया। चूंकि विज्ञापन में एड एजेन्सी का 15 प्रतिषत का कमीषन फिक्स होता है और यह रकम सूचना विभाग के किन अधिकारियो के बीच बंटी इसकी जांच भी की जानी जरूरी है जबकि खुद मुख्यमंत्री ने विभिन्न इलैक्टाॅनिक चैनलो व समाचार पत्रो को सीधे विज्ञापन जारी किए जाने के निर्देष पूर्व में जारी किए थे लेकिन मुख्यमंत्री के इन निर्देर्षो को किसके इषारे पर पलीता लगाया गया और मुख्यमंत्री की छवि को एक बार फिर धूमिल करने का प्रयास मीडिया को गुटो में बांटकर करने का काम किया गया इसकी जांच भी निष्चित रूप से खुद मुख्यमंत्री को करनी चाहिए। वर्तमान में सूचना विभाग के अंदर अनबन अभी भी जारी है और सूचना विभाग के संयुक्त निदेषक राजेष कुमार के पास विज्ञापन जारी किए जाने की जिम्मेदारी भी आ गई है अब निदेषक के बाद राजेष कुमार को विज्ञापन जारी किए जाने का अधिकार मिलने के बाद एक गुट नाराज हो गया है बताया जा रहा है कि पूर्व में विज्ञापन के आरओ काटे जाने की जिम्मेदारी सहायक निदेषक भगतसिह रावत के पास मौजूद थीे लेकिन बीते दिनो टीवी चैनल को विज्ञापन जारी किए जाने के दौरान भगतसिंह रावत द्वारा फाइल पर अनमोदन लाने की बात कहने पर ही आरओ जारी किए जाने की बात कही गई थी और उक्त टीवी चैनल को विज्ञापन जारी नही हो सका था बस इसी बात से साहब का पारा चढ़ गया और तुरन्त इसकी षिकायत उपर तक कर दी गई जिसके बाद भगतसिंह रावत से आरओ काटने की जिम्मेदारी छीन ली गई और यह जिम्मेदारी संयुक्त निदेषक राजेष कुमार को सौंप दी गई। सूचना विभाग में विज्ञापन का घोटाले की बू काफी समय से चली आ रही है और सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या जिस एजेन्सी के माध्यम से सूचना विभाग विज्ञापन जारी का रहा है वह एजेन्सी विभाग में सूचीबद्व है या नहीं जबकि एजेन्सी को सूचना विभाग मे सूचीबद्व होने के साथ डीएवीपी में भी सूचीबद्व होना जरूरी है अब बिना विभाग में सूचीबद्व किए ही एजेन्सी किस आधार पर विज्ञापन जारी कर रही है इसकी जांच भी की जानी जरूरी है सूचना विभाग के नए निदेषक व सचिव को इस मामले में जानकारी है या नही इसकी भी जांच की जानी जरूरी है कहीं ऐसा तो नही सूचना विभाग का कोई अधिकारी आंखो में धूल झोंककर खुद कमीषन को खेल खेल रहा है। सूचना विभाग में गड़बड़ी का गड़बड़ झाला कोई नया नहीं यहां हर कोई अपनी हैसियत के हिसाब से अपना कमीषन पक्का करता है और ईमानदार अधिकारी व कर्मचारियो की फौज बेहद कम है इन इमानदार लोगो को या तो कुर्सी पर नही रहने दिया जाता या फिर उनको वो काम नही सौंपा जाता जिसके वह लायक हैं। समय रहते उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने सूचना विभाग मे पारदर्षी तरीके से विज्ञापन जारी किए जाने का खाका तैयार नही किया तो यह मीडिया को दो गुटो में बांटे जाने का खेल साबित हो सकता ळै और इस मकसद में वो लोग कायमाब हो सकते ळैं जो मुख्यमंत्री की छवि को मीडिया के भीतर बदनाम करना चाहते हैं। अब मुख्यमंत्री इस पूरे प्रकरण की जांच कर दोशी लोगो के खिलाफ क्या कार्यवाही करते हैं इसका इन्तजार सूचना विभाग के अधिकारी व कर्मचारी भी कर रहे हैं।
Monday, August 12, 2013
मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात कौन है यौन उत्पीड़न का आरोपी अधिकारी।
देहरादून। उत्तराखण्ड में सैक्स स्कैंडल के साथ राजनैतिक नेताओ की परिपाटी भी राजनीति के चष्मे से झलकती हुई दिखी है वहीं इसके चलते राज्य का नाम देष के अन्य राज्यो में भी बदनाम हुआ है इस बदनामी का कारण उत्तराखण्ड के ऐसे राजनेता रहे जिन्होने विकास के पायदानो पर उत्तराखण्ड को आगे बड़ाने का काम किया लेकिन साथ ही सैक्स स्कैंडल जैसे मामलो में उत्तराखण्ड की छवि को भी बदनाम कर डाला जिसके चलते उनका राजनैतिक कैरियर तो चैपट हुआ ही उत्तराखण्ड के राजनेताओ को भी उसी चष्मे से देखा जाने लगा। राज्य में यौन उत्पीड़न के मामले लगातार सामने आते जा रहे ळें और इन मामलो में पुलिस, राजनेता और अब षासनस्तर के अधिकारियो की सन्लिप्तता भी सामने आ गई है जिससे साबित हो गया ळै कि उत्तराखण्ड में ऐसे मामले अब षासन का केन्द्र बिन्दु बनते जा रहे ळैं। उत्तराखण्ड के कई राजनेताओ पर यौन उत्पीड़न के मामले देष की सुर्खियां बनते रहे और कांग्रेस के तिवारी षासनकाल में कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत को जैनी कांड के चलते मंत्री पद से भी इस्तीफा देना पड़ा लेकिन बाद में मामले का पटाक्षेप होने के बाद हरक सिंह का दामन साफ हो सका लेकिन कई सालो तक हरक सिंह इस कांड के चलते अपना राजनैतिक कैरियर तबाह कर बैठे इसके बाद हैदराबाद में हुए एनडी तिवारी के सैक्स स्कैंडल ने तिवारी को राज्यपाल के पद से विदा कर दिया और राजनैतिक कैरियर भी तिवारी का कांग्रेस में तबाह हो गया तबसे लेकर आज तक तिवारी अपना राजनैतिक कैरियर षुरू नही कर पाए हैं लेकिन अब षासन के अधिकारियो पर सैक्ैस स्कैंडल के आरोप सामने आए हैं और सचिवालय में तैनात समीक्षा अधिकारी के पद पर तैनात एक महिला ने मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात दो अधिकारियो पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाकर खलबली मचा दी है। सचिवालय के भीतर इस तरह की बात आना कोई बड़ी बात नहीं और समय समय पर ऐसी बातें पूर्व में भी उजागर होती रही हैं लेकिन वर्तमान में उत्तराखण्ड सरकार के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के कार्यालय में तैनात इन अधिकारियो पर आरोप लगने के बाद षासन की कार्यवाही तेज हो गई है, खुद मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने इस मामले की षिकायत सामने आने के बाद इसकी जांच के आदेष दिए हैं। महिला उत्पीड़न के मामले पर सुप्रीम र्कोअ के दिषा निर्देष के अनुरूप् राज्य स्तर पर प्रमुख सचिव को इसकी जिम्मेदारी दी गई है और वर्तमान में प्रमुख सचिव राधा रतूड़ी इस मामले की जांच कर रही हैं लेकिन मुख्यमंत्री कार्यालय के अंदर यदि काम करने वाली महिला सुरक्षित नही तो ऐसे में उत्तराखण्ड के अंदर महिलाओ की सुरक्षा कैसी होगी इसका आंकलन भी सरकार को खुद करना होगा। मुख्यमंत्री का कार्यालय ही जब महिलाओ के लिए सुरक्षित नही तो ऐसे में प्रदेष के अंदर मौजूद महिलाओ की स्थिति जिलो और गांवो में किस कदर होगी इसका आंकलन भी राजनैतिक चष्मे से किया जाना बेहद जरूरी है। हमेषा से ही राजनेताओ का दामन यौन उत्पीड़न के मामले पर दागदार होता रहा है लेकिन यह पहला मौका है जब उत्तराखण्ड सरकादके मुख्यमंत्री कार्यालय में यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया है हाला िकइस मामले में उत्पीड़न का षिकार हुइ महिला ने मुख्यमंत्री को षिकायत की ळै लेकिन अभी तक महिला द्वारा पुलिस को षिकायत ना किए जाने का कारण भी सामने नही आ पाया है। बताया जा रहा है कि जिस अधिकारी पर उत्पीड़ का आरोप लगा है उसमे से एक अधिकारी जून माह में रिटायर हो गया है जबकि एक अन्य अभी भी मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात है। सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री के कार्यालय में तैनात एक बड़े अधिकारी का नाम भी इस मामले में सामने आ रहा हैलेकिन उसे बचाने की हर सम्भव कोषिष की जा रही ळै क्योकि इस अधिकारी के आधीन आने वाले एक विभाग में महिलाओ की तैनाती सबसे ज्यादा की गई है जिसकी जांच की जानी भी बेहद जरूरी है वहीं इस अधिकारी के बारे में आम चर्चा है कि इसका चरित्र हमेषा से ही चर्चित रहा है।
Saturday, August 10, 2013
कैबिनेट मंत्री हरक के पूर्व पीआरओ रावत को क्यो ठिकाने लगाया चर्चित महिला ने...?
देहरादून। उत्तराखण्ड में कांग्रेस की सरकार और सत्ताधारी कैबिनेट मंत्री के पीराओ का कत्ल राजधानी देहरादून में हो जाना कानून व्यवस्था की पोल खोल रहा है साथ ही यह भी साबित कर रहा है कि क्या देहरादून की पुलिस का अपराधियो को खौफ नहीं, याफिर ऐसा गिरोह देहरादून में सक्रिय हो गया है जो एमबीबीएस में दाखिला कराने के लिए मोटी रकम का खेल खेल रहा है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि जब कैबिनेट मंत्री का पूर्व पीआरओ हत्या का षिकार हो गया तो ऐसे में आम जनता कितनी सुरक्षित होगी इसका जवाब तो देहरादून पुलिस के पास ही मौजूद होगा। हालाकि पुलिस इस मामले की कडि़यां सुलझ जाने का दावा कर रही है। वहीं सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार युद्ववीर रावत की हत्या के पीछे कोई बड़ा मामला भी हो सकता है क्योकि कैबिनेट मंत्री हरकसिंह रावत के पूर्व पीआरओ रावत रूद्रप्रयाग क्षेत्र के साथ कई कामो को देखते थे और हरकसिंह के सबसे करीबी माने जाते थे एक राजनैतिक दल के नेता ने नाम ना छपने की षर्त पर खुलासा किया है कि जिस बसंत बिहार की चर्चिित महिला का नाम इस मामले में सामने आया है उसके द्वारा पूर्व में भी एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के नाम पर मेरठ के एक व्यक्ति से 17 लाख रूप्ए लिए गए थे लेकिन आज तक वह रकम वापस नही की गई। प्रौपर्टी के कारोबार में इस विवादित महिला का नाम कई बार सामने आ चुका है और उक्त महिला मूल रूप् से मेरठ की रहने वाली है जो वर्तमान मेंबसंत बिहार थाना क्षेत्र मे रहती है वहीं इस मामले में पकड़ा गया अन्य आरोपी हरिद्वार निवासी है जिसकी कडि़यां उक्त महिला से पुलिस को पूछताछ के दौरान मिलती हुई नजर आई हैं वहीं पोंटा के बलराज षर्मा के हर पहलू की जांच भी पुलिस अपने स्तर से कर रही है। दून अस्पताल में जब युद्ववीर रावत का षव रखा हुआ था तो रावत के एक करीबी दोस्त का साफ कहना था कि युद्ववीर को साजिष के तहत मौत क घाट उतारा गया है और हत्या के बाद अगले दिन सुबह बसंत बिहार निवासी सुधा पटवाल, हरिद्वार निवासी प्रदीप चैहान, कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत के आवास पर मौजूद थे और उनके द्वारा पुलिस के अधिकारियो को फोन कर अपनी मौजूदगी वहां होने की बात कही थी और उक्त लोग पुलिस के भीतर अपना रौब गालिब कर रहे थे लेकिन पुलिस द्वारा अपने स्तर से की गई जांच मंे इस बा का पता चला है िकइस हत्या में इन लोगो की संलिप्तता मौजूद है हालाकि पुलिस ने अभी जांच पूरी नही की है लेकिन माना जा रहा ळै कि मामला हाई प्रोफाइल होने के चलते पुलिस एक दो दिन के भीतर हत्या के मामले में आरोपियो की गिरफतारी दिखा सकती है। पुलिस को जाच में यह भी पता चला है कि युद्ववीर की जेब में पटेल नगर स्थित एसजीआरआर मैडिकल कलेज का 5.23 लाख का एक डीडी भी मिला है और इसके अलावा बलराज षर्मा ने 14 लाख रूप्ए की धनराषि यूद्ववीर दी थी। माना जा रहा है यह रकम हड़पने के लिए युद्ववीर का कत्ल किया हो और इस मामले में करीबी लोगो का हाथ रहा हो। पुलिस अपने स्तर से इस बात की भी जांच कर रही ळै कि युद्ववीर की हत्या किस स्थान पर की गई और उसकी लाष को ठिकाने लगाने के लिए राजपुर खेत्र के सुनसान इलाके को क्यो चुना गया क्योकि पुलिस को जांच में इस बात का भी पता चला ळै कि युद्ववीर की हत्या मौके पर ना करके किसी अन्य स्थान पर की गई थी जिसके बाद लाष को दूसरे स्थान पर ठिकाने लगाया गया क्योकि मौके पर पुलिस को खून के कोई भी निषान नही मिले हैं। पुलिस इस हत्या के मामले का जल्द खुलासा करने का खाका तैयार करने में जुट गई है लेकिन इस हत्या से रूद्रप्रयाग के लोगो में साफतौर से नाराजगी भी देखी जा रही है।
Thursday, August 8, 2013
अंधेर नगरी, चैपट राजा, पुलिस थानो में फर्जी मुकदमे दर्ज करा जा।
Thursday, August 1, 2013
कप्तान साहब प्रेमनगर क्षेत्र में किसके इषारे पर चलता है सट्टा, षराब और नषे का कारोबार.....?
देहरादून। प्रेमनगर क्षेत्र में नषे, सट्टे और षराब का वो कौन कारोबारी है जिसके इषारे पर क्षेत्र में यह धन्धा फल फूल रहा है और पिछले कई महीनो में जितने भी चैकी इन्चार्ज व थानेदार तैनात रहे हैं वो कार्यवाही क्यो नही कर पाए। निष्चित रूप से यह सवाल इसलिए उठाया जा रहा है कि देहरादून के पुलिस कप्तान केवल खुराना को इमानदार पुलिस अफसर के रूप् में इसलिए जाना जाता है कि वह काफी इमानदार लोगो की कतार में खड़े नजर आते है लेकिन पुलिस कप्तान को प्रेमनगर क्षेत्र में पूरी पुलिस चैकी केा लाइन हाजिर क्यो करना पड़ा यह भी बड़ा सवाल देहरादून की जनता जनपद के पुलिस कप्तान से पूछती हुई नजर आ रही है। पुलिस कप्तान ने प्रेमनगर क्षेत्र में जाम लगने के कारण चैकी इन्चार्ज सहित पूरी चैकी को लाइन हाजिर कर दिया लेकिन क्या इसके बाद महकमा ऐसी घटनाएं रोक पाने में कामयाब हो जाएगा इस सवाल का जवाब आने वाले समय में जरूर मिलेगा लेकिन दोपहर के समय राजपुर रोड के घन्टाघर इलाके में लम्बा जाम लग जाता है और धारा चैकी इन्चार्ज जाम को दुरूस्त कर पाने में नाकामयाब साबित होते हैं लेकिन जनपद के पुलिस कप्तान को यह बात भी समझनी होगी कि प्रेमनगर क्षेत्र में सहसपुर जाने के दौरान जाम की जो हालत देखी गई उसी तर्ज पर धाराचैकी क्षेत्र में भी जाम का आंकलन खुद करें और अगर यह बात सच साबित होती है तो खुद ही तय करें कि क्या चैकी इन्चार्ज इसके लिए दोशी नहीं। बड़ सवाल यह भी उठ रहा है कि जनपद देहरादून की पुलिसिंग को लेकर जैसे दावे कप्तान केवल खुराना ने तैनाती के बाद किए थे अब उन दावो की हवा निकलती दिख रही है। सबसे पहले देहरादून की यातायात व्यवस्था को ठीक करने की वाहवाही लूटने वाले कप्तान को प्रेमनगर में जाम लगने के बाद इस हकीकत को बयां कर दिया कि अभी भी देहरादून की यातायात व्यवस्था पटरी पर नही आई है लेकिन मीडिया के कुछ लोगो द्वारा यातायात व्यवस्था को लेकर षुरूआती दौर में ऐसा बवंडर मचाया कि सड़को पर यातायात दिखता हुआ नजर नही आया लेकिन अब पंचायती मंदिर, घन्टाघर सहित कई जगहो पर जाम की बुरी हालत से फिर जनता को दो चार होना पड़ रहा है। इसके अलावा एक बड़ा सवाल देहरादून जनपद के पुलिस कप्तान से कि क्या वो ऐसे थानेदारो व चैकी इन्चार्जो के खिलाफ कार्यवाही करेंगें जो पुलिस की साख को बट्ट्ा लगाने का काम कर रहे हैं और पुलिस के मनोबल को खुद तोड़ रहे हैं। पुलिस के सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में देहरादून के पुलिस कप्तान की कार्यषैली से कई लोग परेषान नजर आ रहे हैं और उनका साफ मानना है कि देहरादून की पुलिसिंग अब पूरी तरह बदल गई है और थाने चैकियो की बजाए पुलिस लाइन में ही बेहतर नौकरी की जा सकती है इसके साथ्ी ही देहरादून के ऐसे पुलिसकर्मी जिनका एक दिन का वेतन पूर्व में काटा गया है वो भी ये सवाल पुलिस विभाग से नाम ना छापने की षर्त पर पूछ रहे हैं कि क्या एक दिन का वेतन काटे जाने का अधिकार जनपद के पुलिस कप्तान को है लेकिन पुलिस व्यवस्था को सुधारने के लिए हर किसी को खुद पहल करनी होगी और इमानदारी से काम कर ऐसे लोगो को जेल भेजना होगा जो वास्तविक रूप से अपराधो के लिए दोशी हैं। पिछले एक सप्ताह से लगातार जनपद देहरादून के अंदर पुलिस को कितनी षिकयतें मिली और उन पर क्या कर्यवाही हुइ इसका जवाब भी पद पुलिस के कप्तान के पास मौजूद नहीं क्योकि पिछले चार दिनो से लगातार जनपद के पुलिस कप्तान फोन उठाना तो दूर बात करने की जहमत भी नही उठा रहे, उनके मोबाइल फोन को कभी उनका गनर तो कभी उनके आॅफिस से पीआरओ फोन कर जानकारी हासिल कर लेता है लेकिन खबर के बारे में कोई भी यह बताने से बचता है कि आखिर देहरादून जिले में कितने षिकायती पत्रो पर क्या कार्यवाही हुई। अब देखना होगा कि क्या जनपद का पुलिस कप्तान पिछले एक सप्ताह के भीतर आई षिकायती पत्रो पर क्या कार्यवाही करते ळैं और षिकायत दर्ज ना करने वाले थाने व चैकी इन्चार्जाे को क्या सजा देते ळैं।
Monday, July 29, 2013
20 साल बाद दाऊद के खिलाफ चार्जशीट
नई दिल्ली। आईपीएल-6 में फिक्सिंग के दौरान सबसे ज्यादा फायदा डॉन दाऊद इब्राहिम को होता था। फिक्सिंग में सबसे ज्यादा रकम उसे ही जाती थी। दाऊद को ये पता होता था कि किस मैच का क्या नतीजा होगा।दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने चार्जशीट में इस बात को रखा है। स्पेशल सेल आईपीएल फिक्सिंग मामले में मंगलवार को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर सकती है। बताया जा रहा है कि चार्जशीट में आरोपियों पर से अमानत में खयानत (409) की धारा हटा ली गई है।
सूत्रों के अनुसार, पुलिस ने चार्जशीट में दाऊद के नाम का जिक्र कॉलम-एक में किया है। पुलिस ने चार्जशीट में आईपीएल के माहौल के बारे में लिखा है। उसके अनुसार, आईपीएल के दौरान होटल में चेकिंग को कोई सिस्टम नहीं है। कोई भी क्रिकेटर से आसानी से मिल सकता है। पुलिस ने चार्जशीट में इस बात का भी जिक्र किया है कि क्रिकेटर फिक्सरों के चुंगल में कैसे फंस जाते हैं।
पुलिस के अनुसार, आईपीएल में क्रिकेटर देश के लिए नहीं बल्कि क्लब के लिए खेलते हैं और क्लब का मालिकान भी गड़बड़ था। कई क्लब के मालिक फिक्सिंग व सट्टेबाजी में लगे रहते हैं। पुलिस चार्जशीट के साथ उन आईपीएल मैचों की सीडी भी कोर्ट को देने जा रही है, जिनमें फिक्सिंग हुई है। इसके अलावा खिलाड़ी व क्रिकेटरों की आवाज के सैंपल और सीएसएफएल की आवाज के सैंपलों की रिपोर्ट भी कोर्ट में जमा करवाई जा रही है। दिल्ली पुलिस ने 35 लोगों को आरोपी बनाया है।दिल्ली पुलिस अधिकारियों के अनुसार, 1993 में मुंबई में सीरियल बम धमाके मामले में अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊ द के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई थी। उसके बाद अब दाऊ द के खिलाफ चार्जशीट दाखिल होगी।
Sunday, July 28, 2013
हुड्डा की राजनैतिक कब्र खोदने में जुटे वीरेन्द्र सिंह।
उत्तराखण्ड मुख्यमंत्री की कुर्सी पर षतरंज की चली थी बेतुकी चाल।
हरियाणा। हुड्डा की राजनैतिक कब्र खोदने के लिए उत्तराखण्ड के पूर्व प्रदेष प्रभारी व कांग्रेसी सांसद वीरेन्द्र सिंह ने कांग्रेस में कुर्सी बिना लाभ के नही मिल पाती कहकर सनसनी फैला दी है। उनके इस बयान के बाद हरियाणा की राजनीति से लेकर दिल्ली तक भूचला आ गया ळै इस भूचाल की जद में उत्तराखण्ड की राजनीति भी गोते खाती हुई नजर आ रही है क्योकि चैधरी वीरेन्द्र सिंह केन्द्रीय रेल मंत्री बनने की लिस्ट में सबसे उपर थे और उनके नाम का एलान लगभग हो चुका था लेकिन एंड टाइम में उनका नाम राजनैतिक विरोधियो द्वारा हटा दिया गया। ऐसी ही घटनाक्रम उत्तराखण्ड में उस वक्त देखने को मिला था जब मुख्यमंत्री के लिए फैसला किया जा रहा था तब भी मुख्यमंत्री का असल दावेदार यषपाल आर्य को माना जा रहा था लेकिन यषपाल को राजनैतिक बिसात पर चारो खाने चित्त कर चैधरी वीरेन्द्र सिंह ने बहुगुणा को मुख्यमंत्री बनवा डाला था। जिसके बाद से मुख्यमंत्री का लगातार विरोध आज तक जारी है लेकिन यषपाल आर्य अभी भी बहुगुणा के सारथी बने हुए ळैं। उत्तराखण्ड के पूर्व प्रदेष प्रभारी चैधरी वीरेन्द्र सिंह का यह बयान कि कांग्रेस में कुर्सी बिना लाभ के नही मिलती कई तरह की षंकाओ को जन्म दे रहा ळै। उनका यह दर्द ऐसे समय में उजागर हुआ ळै जब देष के अंदर 2014 की रणनीति के साथ कांग्रेस मोदी के खौफ से बेचैन नजर आ रही है। आगामी 20 अगस्त को हरियाणा में सोनिया गांधी का रैली के माध्यम से कार्यक्रम निर्धारित है और हरियाणा की राजनीति में हुड्डा व चैघरी के बीच हमेषा से ही 36 का आंकड़ा रहा है और अब अपनी राजनैतिक जमीन को बचाने के लिए चैघरी हरियाणा की रैली में अपनी ताकत का एहसास सोनिया गांधी को कराना चाहते हें और षायद इसी कारण से उन्होने ऐसे समय में उस बयान को हवा दी है जो कांग्रेस के लिए बेहद खतरनाक माना जा रहा है। चैघरी की हरियाणा से राजनैतिक जमीन को बंजर करने के लिए हुड्डा ने भी कोई कसर नही छोड़ी थी और तबसे लेकर आज तक हरियाणा की राजनैतिक जमीन पर चैधरी अपनी फसल लहराने में कामयाब नही हो पाए थे लेकिन अब चैधरी उत्तराखण्ड और दिल्ली की सियासत को इलविदा कहकर हरियाणा में अपना राजनैतिक ग्राफ बड़ाने में जुट गए हैं लेकिन उत्तराखण्ड में राजनैतिक बिसात की जिस षतरंज को उन्होने खेला था अब वहीं षतरंज उनकी राजनैतिक जमीन पर खेली जा रही है।
हरियाणा। हुड्डा की राजनैतिक कब्र खोदने के लिए उत्तराखण्ड के पूर्व प्रदेष प्रभारी व कांग्रेसी सांसद वीरेन्द्र सिंह ने कांग्रेस में कुर्सी बिना लाभ के नही मिल पाती कहकर सनसनी फैला दी है। उनके इस बयान के बाद हरियाणा की राजनीति से लेकर दिल्ली तक भूचला आ गया ळै इस भूचाल की जद में उत्तराखण्ड की राजनीति भी गोते खाती हुई नजर आ रही है क्योकि चैधरी वीरेन्द्र सिंह केन्द्रीय रेल मंत्री बनने की लिस्ट में सबसे उपर थे और उनके नाम का एलान लगभग हो चुका था लेकिन एंड टाइम में उनका नाम राजनैतिक विरोधियो द्वारा हटा दिया गया। ऐसी ही घटनाक्रम उत्तराखण्ड में उस वक्त देखने को मिला था जब मुख्यमंत्री के लिए फैसला किया जा रहा था तब भी मुख्यमंत्री का असल दावेदार यषपाल आर्य को माना जा रहा था लेकिन यषपाल को राजनैतिक बिसात पर चारो खाने चित्त कर चैधरी वीरेन्द्र सिंह ने बहुगुणा को मुख्यमंत्री बनवा डाला था। जिसके बाद से मुख्यमंत्री का लगातार विरोध आज तक जारी है लेकिन यषपाल आर्य अभी भी बहुगुणा के सारथी बने हुए ळैं। उत्तराखण्ड के पूर्व प्रदेष प्रभारी चैधरी वीरेन्द्र सिंह का यह बयान कि कांग्रेस में कुर्सी बिना लाभ के नही मिलती कई तरह की षंकाओ को जन्म दे रहा ळै। उनका यह दर्द ऐसे समय में उजागर हुआ ळै जब देष के अंदर 2014 की रणनीति के साथ कांग्रेस मोदी के खौफ से बेचैन नजर आ रही है। आगामी 20 अगस्त को हरियाणा में सोनिया गांधी का रैली के माध्यम से कार्यक्रम निर्धारित है और हरियाणा की राजनीति में हुड्डा व चैघरी के बीच हमेषा से ही 36 का आंकड़ा रहा है और अब अपनी राजनैतिक जमीन को बचाने के लिए चैघरी हरियाणा की रैली में अपनी ताकत का एहसास सोनिया गांधी को कराना चाहते हें और षायद इसी कारण से उन्होने ऐसे समय में उस बयान को हवा दी है जो कांग्रेस के लिए बेहद खतरनाक माना जा रहा है। चैघरी की हरियाणा से राजनैतिक जमीन को बंजर करने के लिए हुड्डा ने भी कोई कसर नही छोड़ी थी और तबसे लेकर आज तक हरियाणा की राजनैतिक जमीन पर चैधरी अपनी फसल लहराने में कामयाब नही हो पाए थे लेकिन अब चैधरी उत्तराखण्ड और दिल्ली की सियासत को इलविदा कहकर हरियाणा में अपना राजनैतिक ग्राफ बड़ाने में जुट गए हैं लेकिन उत्तराखण्ड में राजनैतिक बिसात की जिस षतरंज को उन्होने खेला था अब वहीं षतरंज उनकी राजनैतिक जमीन पर खेली जा रही है।
टीईटी परीक्षा पास कराने के नाम पर सरकारी अध्यापक व कोचिंग इन्स्टीट्यूट संचालक गिरफतार।
हल्द्वानी। गुरू छात्र के जीवन में उसे आगे बड़ाने के साथ साथ ऐसे संस्कारो को भी भरता है जिसकी नीव पर उस छात्र की बुनियाद मजबूत होती है लेकिन गुरू के नाम पर छात्रो के भविष्य से खिलवाड़ कर लाखो रूप्ए टीईटी परीक्षा पास कराने के नाम पर पुलिस ने दो लोगो को सैकड़ो छात्रो के साथ गिरफतार किया है। देश भर मे टीईटी की परीक्षा शान्तिपूर्ण तरीके से सम्पन्न हो रही ळै वही उत्तराखण्ड के हल्द्वानी में सहायक अध्यापक के साथ कोचिंग इन्स्टीटयूट चलाने वाले गिरोह का पुलिस ने भांडा फोड़ किया है। यह गिरोह पिछले काफी समय से परीक्षा पास कराने के नाम पर 150 से अधिक छात्रो को अपने झांसे में ले चुका था और हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखण्ड सहित अन्य राज्यो के 70 से अधिक छात्रो को परीक्षा पास कराने के लिए जरूरी कागजातो के साथ एक वैडिंग प्वाइंट में इकठ्ठा कर लिया गया था। परीक्षा पास करने के बाद प्रत्येक छात्र से डेड़ से दो लाख रूप्ए लिए जाने तय हुए थे और यह रकम कई लोगो के बीच बांटी जानी तय थी। इस काम में दिल्ली के 4 छात्रो को भी मिलाया गया था जिन्हें बैंकट हाल में रूके छात्रो को पेपर उपलब्ध कराने थे। गैंग ने छात्रो को विश्वास में लेने के लिए दिल्ली से इन चारो लोगो के पेपर लाने की बात का विश्वास दिलाया था और एक ऐसा पेपर तैयार किया था जिससे छात्रो को यह यकीन हो जाए कि वह टीईटी की परीक्षा का पेपर दे रहे हैं। इस गैंग के काफी समय से उत्तराखण्ड के अलावा अन्य राज्यो में काम करने की जानकारी पुलिस को लग गई थी और आज प्रातः बिठोरिया स्थित सृष्टि बैंकट हाल में इस गैंग द्वारा जब वहां रूके छात्रो से उनके स्कूली दस्तावेजो को एकत्र किया जा रहा था तभी नैनीताल के एसएसपी सदानन्द दाते के नेतृत्व में पुलिस टीमो ने छापा मारकर यहां से इन लोगो को गिरफतार कर लिया। पुलिस को छापे के बाद पता चला कि लोहाघाट के सरकारी स्कूल में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात बलवन्त सिंह का पूर्व में भी वायरलैस की भर्ती में नाम सामने आया था लेकिन उस समय वह पुलिस के षिकंजे से बच निकला था। बलवन्त सिंह ने हल्द्वानी निवासी शशिकान्त जो कि कोचिंग इन्स्ट्ीट्यूट चलाता ळै के साथ मिलकर इस काम को अंजाम देने का खाका तैयार किया था और पुलिस पकड़े गए गिरोह से यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही ळै कि इनके द्वारा अन्य होने वाली परीक्षाओ के लिए भी तो अभ्यार्थियो से रकम वसूल नही की है, पुलिस को इस बात की भी जानकारी मिल रही है कि इनके तार कई अन्य राज्यो से जुड़े होने की सम्भावाना भी हो सकती है।
Tuesday, July 2, 2013
वीना थाइलैंड में फिल्म की शूटिंग के दौरान चोटिल
बैंकॉक : अपने बोल्ड
इमेज को लेकर पर्दे पर और पर्दे के पीछे हमेशा सुर्खियों में रहने वाली
पाकिस्तानी अभिनेत्री वीना मलिक ने एक बार फिर सुर्खियों में आई हैं. इस
बार हॉट इमेज को लेकर नहीं बल्कि फिल्म की शूटिंग के दौरान चोटिल होने के
कारण. वीना थाइलैंड में फिल्म की शूटिंग के दौरान चोटिल हो गईं.
वीना मलिक को फिल्म `सिल्क सक्कत मागा` की
शूटिंग के दौरान चोट लग गई. शूटिंग के दौरान वीना के पैर का नाखून उखड़
गया और खून बहने लगा. तुरंत डॉक्टर्स को बुलाया गया और मरहम पट्टी की गई.
कुछ घंटों के लिए शूटिंग रोकनी पड़ी.
वीना का कहना है कि चोट लगना उसके लिए नई
बात नहीं लेकिन यह चोट उसको भारी पड़ी क्योंकि वह जिस गाने की शूटिंग कर
रही थी उसमें रोमांस के लिए इमोशंस लाने थे. चोट लगने की वजह से उसके चेहरे
पर दर्द दिखाई दे रहा था और यह मेरे थोड़ा मुश्किल था. उल्लेखनीय है कि
भारत में अपने कैरियर की शुरूआत करने वाली हॉट वीना मलिक अपने बढते क्रेज
से काफी उत्साहित दिख रही है। सूत्रों के अनुसार सुपरहिट फिल्म "डर्टी
पिक्चर" की कन्नड़ में बनी रिमेक "सिल्क सकाथ हॉट मैगा" के लिए उसे
रिकॉर्डतोड परिश्रमिक दिया गया है।
Thursday, February 21, 2013
उत्तराखंड मीडिया सेंटर में विवाद, नारायण परगांई को जान से मारने की धमकी
देहरादून। खबर के खिलाफ बिलबिलाते हुए लोगों को तो देखा होगा लेकिन बिना
नाम छपे ही मीडिया सेन्टर में ‘‘पत्रकारों को किया कैद‘‘ नामक खबर से
रोजाना चाय की चुस्की लेने वाले ऐसे तथाकथित पत्रकार बिलबिला उठे कि जैसे
वह फिल्मी स्टाइल में अपनी गुन्डई दिखा रहे हों। मीडिया सेन्टर सचिवालय में
आज जी न्यूज के स्ट्रिंगर नरेश तोमर, न्यूज 24 के अधीर यादव व राजेश वर्मा
ने अपना आपा इस कदर खो डाला कि गाली-ग्लौज से लेकर जान से मारने तक की
धमकी दे दी गई।
रोजाना की तरह सचिवालय में खबरों के बाद देहरादून के पत्रकार नारायण परगांई ने दोपहर बाद उत्तराखण्ड के सचिवालय स्थित मीडिया सेन्टर में जैसे ही प्रवेश किया तो पत्रकारों के लिए बने कक्ष में राजेश वर्मा बीते दिनों छापी गई खबर की बौखलाहट दिखाते हुए फिल्मी स्टाइल में गुन्डई वाली भाषा का प्रयोग करते हुए गालियां बकनी शुरू कर दी। विरोध करने पर हमेशा के लिए पत्रकारिता को भुला देने की धमकी भी दी गई। इसके बाद बढ़े विवाद के बाद न्यूज 24 के अधीर यादव व जी न्यूज के नरेश तोमर ने मिलकर अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए मारपीट करनी चाही। वहां तमाशबीन बने एबीपी न्यूज के पत्रकार अतुल चैहान, आईबीएन7 के संजीव शर्मा एवं पत्रकारों के नेता के रूप में विश्वजीत नेगी भी मौके पर मौजूद थे, लेकिन किसी ने भी गुंडों की भाषा प्रयोग करने वाले तथाकथित पत्रकारों को रोकने की कोशिश तक नहीं की, जबकि पत्रकारों को मीडिया सेन्टर में कैद करने की जानकारी एबीपी न्यूज के अतुल चैहान द्वारा ही दी गई थी।
घटना के बाद काफी देर तक सचिवालय मीडिया सेन्टर में हंगामे की स्थिति बनी रही। उसके बाद किसी तरह वहां से निकलने के बाद नारायण परगांई ने इसकी जानकारी अन्य पत्रकार मित्रों को दी, जिसके बाद सभी एक स्थान पर एकत्र होकर जनपद के पुलिस कप्तान केवल खुराना के आवास पर तीनों आरोपियो के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग को लेकर तहरीर सौंपा। मीडिया सेन्टर में सरकार के खलाफ साजिश के ऐसे बीज बोए जाते हैं, जिसकी भनक उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर सूचना विभाग के अधिकारियों तक को नहीं। पूर्व में भी मीडिया सेन्टर विवादों के घेरे में रह चुका है। यहां के कम्प्यूटर सिस्टमों में पोर्न फिल्में देखे जाने की शिकायतें भी सूचना विभाग को लगी थी। अब देखना होगा कि दूसरो को आईना दिखाने वाले यह तथाकथित पत्रकार किस मुंह से अपना जवाब देते हैं।
रोजाना की तरह सचिवालय में खबरों के बाद देहरादून के पत्रकार नारायण परगांई ने दोपहर बाद उत्तराखण्ड के सचिवालय स्थित मीडिया सेन्टर में जैसे ही प्रवेश किया तो पत्रकारों के लिए बने कक्ष में राजेश वर्मा बीते दिनों छापी गई खबर की बौखलाहट दिखाते हुए फिल्मी स्टाइल में गुन्डई वाली भाषा का प्रयोग करते हुए गालियां बकनी शुरू कर दी। विरोध करने पर हमेशा के लिए पत्रकारिता को भुला देने की धमकी भी दी गई। इसके बाद बढ़े विवाद के बाद न्यूज 24 के अधीर यादव व जी न्यूज के नरेश तोमर ने मिलकर अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए मारपीट करनी चाही। वहां तमाशबीन बने एबीपी न्यूज के पत्रकार अतुल चैहान, आईबीएन7 के संजीव शर्मा एवं पत्रकारों के नेता के रूप में विश्वजीत नेगी भी मौके पर मौजूद थे, लेकिन किसी ने भी गुंडों की भाषा प्रयोग करने वाले तथाकथित पत्रकारों को रोकने की कोशिश तक नहीं की, जबकि पत्रकारों को मीडिया सेन्टर में कैद करने की जानकारी एबीपी न्यूज के अतुल चैहान द्वारा ही दी गई थी।
घटना के बाद काफी देर तक सचिवालय मीडिया सेन्टर में हंगामे की स्थिति बनी रही। उसके बाद किसी तरह वहां से निकलने के बाद नारायण परगांई ने इसकी जानकारी अन्य पत्रकार मित्रों को दी, जिसके बाद सभी एक स्थान पर एकत्र होकर जनपद के पुलिस कप्तान केवल खुराना के आवास पर तीनों आरोपियो के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग को लेकर तहरीर सौंपा। मीडिया सेन्टर में सरकार के खलाफ साजिश के ऐसे बीज बोए जाते हैं, जिसकी भनक उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर सूचना विभाग के अधिकारियों तक को नहीं। पूर्व में भी मीडिया सेन्टर विवादों के घेरे में रह चुका है। यहां के कम्प्यूटर सिस्टमों में पोर्न फिल्में देखे जाने की शिकायतें भी सूचना विभाग को लगी थी। अब देखना होगा कि दूसरो को आईना दिखाने वाले यह तथाकथित पत्रकार किस मुंह से अपना जवाब देते हैं।
Monday, November 26, 2012
Wednesday, October 31, 2012
मुख्यमंत्री की जल्दबाजी ने उठाए सवाल
देहरादून, नारायण दत्त तिवारी सरकार के दौरान प्रदेश में स्थापित औद्योगिक
क्षेत्रों में लगे उद्योगों को राज्य सरकार प्रदेश में नहीं रोक पाई, ऐसे
में मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा द्वारा सितारगंज फेज-2 नाम पर बनाए जा रहे
औद्योगिक क्षेत्र को लेकर सरकार पर ही सवाल उठने शुरू हो गए हैं। सरकार पर
जहां विपक्ष करारे प्रहार कर रहा है, वहीं बहुगुणा सरकार पर केंद्रीय
मंत्री हरीश रावत ने भी सवाल खड़े कर प्रदेश में किए जा रहे औद्योगिकीकरण पर
भी सवालिया निशान लगा दिए हैं। इतना ही नहीं राज्य में स्थापित उद्योगों
के उद्योगपति भी इस पर मुखर हो गए हैं। उनका कहना है कि अटल बिहारी वाजपेयी
द्वारा राज्य में स्थापित होने वाले उद्योगों को विशेष औद्योगिक पैकेज की
तयशुदा सीमा जब कांग्रेस सरकार नहीं बढ़ा पाई तो ऐसे में कौन उद्योगपति यहां
उद्योग लगाएगा, यह उनके समझ से परे है। उद्योगपतियों का कहना है कि राज्य
में औद्योगिक वातावरण बिलकुल नहीं है, सिंगल विंडो व्यवस्था के तहत
उद्योगपतियों को राज्य में सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। अरबों रूपयों
उद्योग लगाने में खर्च करने वालों को अनापत्ति प्रमाण पत्र सहित बिजली के
संयोजन के लिए अपने जूते घिसने पड रहे हैं, तो ऐसे वातावरण में कौन
उद्योगपति राज्य में उद्योग लगाने के लिए आएगा यह उनकी समझ से परे है।
बीते दिन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा द्वारा 45 करोड़ की योजनाओं की नींव सिडकुल फेज-2 के नाम पर सितारगंज में रखी गई। सरकार का दावा है कि यहां 1300 एकड़ भूमि पर उद्योगों को बसाया जाएगा और सिडकुल यहां उद्योगों की स्थापना व अवस्थापना सुविधाएं जुटाने पर 300 करोड़ रूपये खर्च करेगा। सरकार ने उम्मीद जताई है कि इससे 5000 करोड़ रूपया का पूंजीनिवेश होगा और 1000 करोड़ की कमाई सिडकुल की होगी।
सरकार की उम्मीदों के महल पर बन रहे सिडकुल फेज-2 को लेकर सवालिया निशान खड़े होने शुरू हो गए हैं। जहां केंद्रीय राज्य मंत्री हरीश रावत ने सरकार को राज्य में स्थापित औद्योगिक क्षेत्रों को संभालने की बात कही, वहीं राज्य के उद्योगपति भी इससे नाराज हैं।
राज्य में कृषि क्षेत्र की जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि राज्य में जहां 65 फीसदी भू-भाग वनाच्छादित है, वहीं मात्र चार से पांच फीसदी भू-भाग ही खेती के लिए बचा हुआ है, ऐसे में जब राज्य के खेती वाली भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र बसा दिए जाएंगे तो ऐसे में राज्य में कृषि भूमि खेती के लिए रहेगी ही नहीं। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि राज्य मंे बंजर भूमि अथवा खेती के लिए अनउपयुक्त भूमि पर ही औद्योगिकीकरण किया जाना चाहिए इससे जहां प्रदेश की खेती भी बचेगी, वहीं बेकार भूमि का उपयोग औद्योगिकीकरण के लिए उपयोग में लाया जा सकेगा।
इधर भारतीय जनता पार्टी के नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट सहित तमाम नेताओं ने प्रदेश के मुख्यमंत्री पर आरोप लगाते हुए कहा कि आखिर उन्हें राज्य में किसानों को उजाड़कर औद्योगिकीकरण करने की इतनी जल्दी क्यों है? उन्होंने कहा कि राज्य में स्थापित उद्योगों को सबसे पहले सुविधाएं दी जानी चाहिए, जब ये उद्योग पूरी तरह स्थापित हो जाएं तब अन्य उद्योग परिक्षेत्र के बारे में सोचा जाना चाहिए।
बीते दिन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा द्वारा 45 करोड़ की योजनाओं की नींव सिडकुल फेज-2 के नाम पर सितारगंज में रखी गई। सरकार का दावा है कि यहां 1300 एकड़ भूमि पर उद्योगों को बसाया जाएगा और सिडकुल यहां उद्योगों की स्थापना व अवस्थापना सुविधाएं जुटाने पर 300 करोड़ रूपये खर्च करेगा। सरकार ने उम्मीद जताई है कि इससे 5000 करोड़ रूपया का पूंजीनिवेश होगा और 1000 करोड़ की कमाई सिडकुल की होगी।
सरकार की उम्मीदों के महल पर बन रहे सिडकुल फेज-2 को लेकर सवालिया निशान खड़े होने शुरू हो गए हैं। जहां केंद्रीय राज्य मंत्री हरीश रावत ने सरकार को राज्य में स्थापित औद्योगिक क्षेत्रों को संभालने की बात कही, वहीं राज्य के उद्योगपति भी इससे नाराज हैं।
राज्य में कृषि क्षेत्र की जानकारी रखने वाले लोगों का कहना है कि राज्य में जहां 65 फीसदी भू-भाग वनाच्छादित है, वहीं मात्र चार से पांच फीसदी भू-भाग ही खेती के लिए बचा हुआ है, ऐसे में जब राज्य के खेती वाली भूमि पर औद्योगिक क्षेत्र बसा दिए जाएंगे तो ऐसे में राज्य में कृषि भूमि खेती के लिए रहेगी ही नहीं। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि राज्य मंे बंजर भूमि अथवा खेती के लिए अनउपयुक्त भूमि पर ही औद्योगिकीकरण किया जाना चाहिए इससे जहां प्रदेश की खेती भी बचेगी, वहीं बेकार भूमि का उपयोग औद्योगिकीकरण के लिए उपयोग में लाया जा सकेगा।
इधर भारतीय जनता पार्टी के नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट सहित तमाम नेताओं ने प्रदेश के मुख्यमंत्री पर आरोप लगाते हुए कहा कि आखिर उन्हें राज्य में किसानों को उजाड़कर औद्योगिकीकरण करने की इतनी जल्दी क्यों है? उन्होंने कहा कि राज्य में स्थापित उद्योगों को सबसे पहले सुविधाएं दी जानी चाहिए, जब ये उद्योग पूरी तरह स्थापित हो जाएं तब अन्य उद्योग परिक्षेत्र के बारे में सोचा जाना चाहिए।
Saturday, September 29, 2012
ईमानदार डीजीपी सत्यव्रत भ्रश्टाचारियो पर चलाएंगे हन्टर।
देहरादून। नारायण परगांई।
उत्तराखण्ड पुलिस के डीजीपी विजय राघव पंत महकमे को ठीक ढंग से चला पाने में नाकामयाब साबित हुए पुलिस महकमे के अंदर आलाअधिकारी अनुषासनहीनता के पैमाने को बड़ाते हुए जहां नजर आए वहीं प्रदेष की कानून व्यवस्था भी बेहद लचर रही लेकिन प्रदेष के नए डीजीपी बने सत्यव्रत बंसल आगामी 30 सितम्बर को उत्तराखरण्ड डीजीपी के पद पर विराजमान होंगे और इसी दिन विजय राघव पंत डीजीपी की कुर्सी से सेवा निवृत हो जाएंगे। सत्यव्रत वर्तमान मे सतर्कता विभाग के महानिदेषक के पद पर कार्यरत थे और उन्हें प्रदेष के इमानदार आइपीएस अधिकारियो में गिना जाता है। 1976 बैच के सत्यव्रत इससे पूर्व भी डीजीपी की दौड़ में षामिल थे लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर विजय राघव पंत को डीजीपी की कुर्सी पर विराजमान कर दिया था। 6 महीने के कार्यकाल में पंत महकमे में कोई खास काम नही कर सके और कई ऐसे फैसले विभाग में सामने आए जिन्होने पुलिस महकमे को षर्मसार किए रखा। विभाग के अंदर गुटबाजी इस कदर हावी रही कि आइपीएस लाॅबी कई गुटो में बंटी हुई नजर आई। जिलो में पोस्टिंग को लेकर जिस तरह से एक दूसरे के खिलाफ तानाबाना बुना गया इसकी गूंज दिल्ली के साथ साथ राजनीति के गलियारो में भी साफ सुनाई देती हुई नजर आई। सत्यवंत बंसल के डीजीपी बनने के बाद महकमे में भ्रश्टाचार की बेलो को आगे बड़ा रहे महकमे के ही पुलिस अधिकारी सक्ते में आ गए हैं और माना जा रहा ळैं कि डीजीपी की कुर्सी पर बैठने के बाद सत्यव्रत सबसे पहले विभाग में पनप रहे भ्रश्टाचार की बेल को समाप्त करेंगे। इमानदार आइपीएस होने के साथ सत्यव्रत बंसल की पारिवारिक पृश्ठ भूमि आरएसएस परिवार से रही है और उनके पिताजी आरएसएस के नेता होने के साथ राजनीति में भी दखल रखते हैं। 6 महीने पहले जब डीजीपी की कुर्सी को लेकर प्रदेष में घमासान चल रहा था तब सत्यव्रत का नाम सबसे आगे आ रहा था लेकिन भाजपा के ही कुछ नेताओ ने उन्हें दरकिनार कर विजय राघव पंत को प्रदेष का नसा डीजपी बनवा दिया था और उसके बाद से सत्यव्रत सतर्कता विभाग के महानिदेषक के पद पर कार्यरत थे। उनके डीजीपी बन जाने से पुलिस महकमे के इमानदार अधिकारियो मे खुषी की लहर देखती हुई मिल रही है और उनक ताजपोषी के बाद कई जिलो के पुलिस कप्तानो की कुर्सी हिलनी भी तय मानी जा रही है। प्रदेष के कई जिलो में जहां अपराध बड़ने के साथ जनता के बीच पुलिस की छवि दागदार बनी हुई है वहां फेरबदल होना तय माना जा रहा ळै।भाग के अब देखना होगा कि उत्त्राखण्ड के पुलिस महकमे को जो कुछ अधिकारियो की भ्रश्टाचारी बेलो के सहारे धूमिल हो गया है उसे नए डीजीपी सत्यव्रत बंसल कैसे बदलेंगे। बंसल को तेज तर्रार आइपीएस अधिकारियो में भी ष्ुामार किया जाता है और महकमे को किस तरह लाना है इसकी परिभाशा भी उन्हे बखूबी आती ळै।
उत्तराखण्ड पुलिस के डीजीपी विजय राघव पंत महकमे को ठीक ढंग से चला पाने में नाकामयाब साबित हुए पुलिस महकमे के अंदर आलाअधिकारी अनुषासनहीनता के पैमाने को बड़ाते हुए जहां नजर आए वहीं प्रदेष की कानून व्यवस्था भी बेहद लचर रही लेकिन प्रदेष के नए डीजीपी बने सत्यव्रत बंसल आगामी 30 सितम्बर को उत्तराखरण्ड डीजीपी के पद पर विराजमान होंगे और इसी दिन विजय राघव पंत डीजीपी की कुर्सी से सेवा निवृत हो जाएंगे। सत्यव्रत वर्तमान मे सतर्कता विभाग के महानिदेषक के पद पर कार्यरत थे और उन्हें प्रदेष के इमानदार आइपीएस अधिकारियो में गिना जाता है। 1976 बैच के सत्यव्रत इससे पूर्व भी डीजीपी की दौड़ में षामिल थे लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर विजय राघव पंत को डीजीपी की कुर्सी पर विराजमान कर दिया था। 6 महीने के कार्यकाल में पंत महकमे में कोई खास काम नही कर सके और कई ऐसे फैसले विभाग में सामने आए जिन्होने पुलिस महकमे को षर्मसार किए रखा। विभाग के अंदर गुटबाजी इस कदर हावी रही कि आइपीएस लाॅबी कई गुटो में बंटी हुई नजर आई। जिलो में पोस्टिंग को लेकर जिस तरह से एक दूसरे के खिलाफ तानाबाना बुना गया इसकी गूंज दिल्ली के साथ साथ राजनीति के गलियारो में भी साफ सुनाई देती हुई नजर आई। सत्यवंत बंसल के डीजीपी बनने के बाद महकमे में भ्रश्टाचार की बेलो को आगे बड़ा रहे महकमे के ही पुलिस अधिकारी सक्ते में आ गए हैं और माना जा रहा ळैं कि डीजीपी की कुर्सी पर बैठने के बाद सत्यव्रत सबसे पहले विभाग में पनप रहे भ्रश्टाचार की बेल को समाप्त करेंगे। इमानदार आइपीएस होने के साथ सत्यव्रत बंसल की पारिवारिक पृश्ठ भूमि आरएसएस परिवार से रही है और उनके पिताजी आरएसएस के नेता होने के साथ राजनीति में भी दखल रखते हैं। 6 महीने पहले जब डीजीपी की कुर्सी को लेकर प्रदेष में घमासान चल रहा था तब सत्यव्रत का नाम सबसे आगे आ रहा था लेकिन भाजपा के ही कुछ नेताओ ने उन्हें दरकिनार कर विजय राघव पंत को प्रदेष का नसा डीजपी बनवा दिया था और उसके बाद से सत्यव्रत सतर्कता विभाग के महानिदेषक के पद पर कार्यरत थे। उनके डीजीपी बन जाने से पुलिस महकमे के इमानदार अधिकारियो मे खुषी की लहर देखती हुई मिल रही है और उनक ताजपोषी के बाद कई जिलो के पुलिस कप्तानो की कुर्सी हिलनी भी तय मानी जा रही है। प्रदेष के कई जिलो में जहां अपराध बड़ने के साथ जनता के बीच पुलिस की छवि दागदार बनी हुई है वहां फेरबदल होना तय माना जा रहा ळै।भाग के अब देखना होगा कि उत्त्राखण्ड के पुलिस महकमे को जो कुछ अधिकारियो की भ्रश्टाचारी बेलो के सहारे धूमिल हो गया है उसे नए डीजीपी सत्यव्रत बंसल कैसे बदलेंगे। बंसल को तेज तर्रार आइपीएस अधिकारियो में भी ष्ुामार किया जाता है और महकमे को किस तरह लाना है इसकी परिभाशा भी उन्हे बखूबी आती ळै।
Saturday, July 21, 2012
डैमेज कंट्रोल की कोशिशें आखिरकार चौथे दिन सुबह रंग लाई
देहरादून
पौड़ी जिले के डीएम को हटाने के मुद्दे पर मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और श्रीनगर क्षेत्र के विधायक गणेश गोदियाल के बीच कहासुनी से उपजे सियासी विवाद का शनिवार को नाटकीय ढंग से पटाक्षेप हो गया। मुख्यमंत्री ने विधायक से दूरभाष पर संपर्क साधा तो कुछ देर की बातचीत में दोनों पक्षों ने गिले-शिकवे दूर किए। चार दिनों तक खींचतान के बाद मामला शांत होने पर मुख्यमंत्री के साथ ही पार्टी भी राहत महसूस कर रही है। उधर, पार्टी का एक खेमा अब भी विधायकों पर नौकरशाहों को तरजीह देने के मामले पर मुखर है। हाईकमान के तेवर देखते हुए इस गुट ने फिलहाल आग में दबी चिंगारी की तरह चुप्पी ओढ़ रखी है।
मुख्यमंत्री और सत्तारूढ़ दल के ही विधायक के बीच कहासुनी से उपजे विवाद के तूल पकड़ने से पार्टी असहज महसूस कर रही थी। पार्टी हाईकमान, वरिष्ठ नेताओं और संगठन के हस्तक्षेप से बने दबाव के चलते दोनों ही पक्षों को ठंडा रुख अपनाने को मजबूर कर दिया। बीती बुधवार को सीएम आवास पर सत्तापक्ष के विधायकों की बैठक में पौड़ी जिले के जिलाधिकारी के रवैये से नाराज विधायक गोदियाल ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से की। विधायक के लहजे पर मुख्यमंत्री के भड़कने से यह मामला तूल पकड़ गया था। इससे सरकार की छवि पर पड़ रहे असर के मद्देनजर पार्टी हाईकमान ने भी मामले को जल्द शांत करने की हिदायत दी। तीन दिन से डैमेज कंट्रोल की कोशिशें आखिरकार चौथे दिन सुबह रंग लाई। बीते गुरुवार को राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए मतदान के दिन से ही इस प्रकरण में में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे काबीना मंत्री हरक सिंह रावत शनिवार सुबह करीब नौ बजे मुख्यमंत्री आवास पहुंचे। उन्होंने विधायक की नाराजगी दूर करने के लिए मुख्यमंत्री से वार्ता की पहल का सुझाव दिया। इसके बाद काबीना मंत्री रावत की मौजूदगी में ही मुख्यमंत्री बहुगुणा ने दूरभाष विधायक गोदियाल से वार्ता की। कुछ देर बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने गिले-शिकवे दूर किए। संपर्क करने पर हरक सिंह रावत ने इसकी पुष्टि की। उधर, पार्टी सूत्रों के मुताबिक गोदियाल प्रकरण पर अन्य कई विधायक अब भी मुखर हैं। उनकी मंशा है कि सरकार के मुखिया की ओर से नौकरशाहों पर सख्ती से अंकुश लगाने के संकेत दिए जाने चाहिए। इस गुट में गोदियाल को भी शामिल बताया जा रहा है।
पौड़ी जिले के डीएम को हटाने के मुद्दे पर मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और श्रीनगर क्षेत्र के विधायक गणेश गोदियाल के बीच कहासुनी से उपजे सियासी विवाद का शनिवार को नाटकीय ढंग से पटाक्षेप हो गया। मुख्यमंत्री ने विधायक से दूरभाष पर संपर्क साधा तो कुछ देर की बातचीत में दोनों पक्षों ने गिले-शिकवे दूर किए। चार दिनों तक खींचतान के बाद मामला शांत होने पर मुख्यमंत्री के साथ ही पार्टी भी राहत महसूस कर रही है। उधर, पार्टी का एक खेमा अब भी विधायकों पर नौकरशाहों को तरजीह देने के मामले पर मुखर है। हाईकमान के तेवर देखते हुए इस गुट ने फिलहाल आग में दबी चिंगारी की तरह चुप्पी ओढ़ रखी है।
मुख्यमंत्री और सत्तारूढ़ दल के ही विधायक के बीच कहासुनी से उपजे विवाद के तूल पकड़ने से पार्टी असहज महसूस कर रही थी। पार्टी हाईकमान, वरिष्ठ नेताओं और संगठन के हस्तक्षेप से बने दबाव के चलते दोनों ही पक्षों को ठंडा रुख अपनाने को मजबूर कर दिया। बीती बुधवार को सीएम आवास पर सत्तापक्ष के विधायकों की बैठक में पौड़ी जिले के जिलाधिकारी के रवैये से नाराज विधायक गोदियाल ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से की। विधायक के लहजे पर मुख्यमंत्री के भड़कने से यह मामला तूल पकड़ गया था। इससे सरकार की छवि पर पड़ रहे असर के मद्देनजर पार्टी हाईकमान ने भी मामले को जल्द शांत करने की हिदायत दी। तीन दिन से डैमेज कंट्रोल की कोशिशें आखिरकार चौथे दिन सुबह रंग लाई। बीते गुरुवार को राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए मतदान के दिन से ही इस प्रकरण में में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे काबीना मंत्री हरक सिंह रावत शनिवार सुबह करीब नौ बजे मुख्यमंत्री आवास पहुंचे। उन्होंने विधायक की नाराजगी दूर करने के लिए मुख्यमंत्री से वार्ता की पहल का सुझाव दिया। इसके बाद काबीना मंत्री रावत की मौजूदगी में ही मुख्यमंत्री बहुगुणा ने दूरभाष विधायक गोदियाल से वार्ता की। कुछ देर बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने गिले-शिकवे दूर किए। संपर्क करने पर हरक सिंह रावत ने इसकी पुष्टि की। उधर, पार्टी सूत्रों के मुताबिक गोदियाल प्रकरण पर अन्य कई विधायक अब भी मुखर हैं। उनकी मंशा है कि सरकार के मुखिया की ओर से नौकरशाहों पर सख्ती से अंकुश लगाने के संकेत दिए जाने चाहिए। इस गुट में गोदियाल को भी शामिल बताया जा रहा है।
राहुल के नेतृत्व में आम चुनाव लड़े कांग्रेस
नई दिल्ली। राहुल गांधी के बड़ी भूमिका के लिए तैयार होने की बात कहते ही
सभी दिग्गज कांग्रेसियों ने एक-दूसरे के सुर में सुर मिलाते हुए अगला आम
चुनाव उनके नेतृत्व में ही लड़ने का राग अलापना शुरू कर दिया है। उत्तराखंड
के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अपने दो
दौर पूरे कर रहे हैं। अब कांग्रेस को वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव राहुल के
नेतृत्व में ही लड़ना चाहिए। कुछ ऐसी ही पैरोकारी ऑस्कर फर्नाडिस, वीरप्पा
मोइली, दिग्विजय सिंह और सुबोध कांत सहाय ने भी की है।
बहुगुणा ने कहा कि राहुल को पूरे देश से स्वीकार्यता मिल रही है। ऐसे में वही भविष्य के प्रधानमंत्री के तौर पर पेश किए जाने के लिए सबसे बेहतर विकल्प हैं। जब उनसे पूछा गया कि राहुल को कौन सी जिम्मेदारी लेनी चाहिए, तो वरिष्ठ कांग्रेस नेता कहा कि उन्हें सरकार और पार्टी दोनों में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। कुछ इसी अंदाज में वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ऑस्कर फर्नाडिस ने कहा कि राहुल हमें नेतृत्व प्रदान करेंगे। वहीं, कंपनी मामलों के मंत्री एम वीरप्पा मोइली ने कहा कि अब राहुल को निर्णायक भूमिका में आना ही होगा। उन्होंने कहा कि राहुल ने पार्टी को काफी समय दिया है और वह देश के युवाओं में काफी उत्साह भर चुके हैं। अब पूरा देश चाहता है कि वह ज्यादा सक्रिय भूमिका में नजर आएं।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि गांधी परिवार ने देश को जितना दिया है, उतना देश से लिया नहीं है। उन्होंने कहा कि इस परिवार ने देश के लिए बड़े बलिदान किए हैं और दो बड़े नेताओं को न्योछावर किया है। केंद्रीय पर्यटन मंत्री सुबोध कांत सहाय ने राहुल गांधी द्वारा संगठन की कमान पूरी तरह संभालने की पैरोकारी की। उन्होंने कहा कि इससे देश भर में कांग्रेस मजबूती से आगे बढ़ेगी। साथ ही 2014 के लोकसभा चुनाव में केवल यूपी में ही नहीं पूरे देश में बेहतर परिणाम आएंगे।
बहुगुणा ने कहा कि राहुल को पूरे देश से स्वीकार्यता मिल रही है। ऐसे में वही भविष्य के प्रधानमंत्री के तौर पर पेश किए जाने के लिए सबसे बेहतर विकल्प हैं। जब उनसे पूछा गया कि राहुल को कौन सी जिम्मेदारी लेनी चाहिए, तो वरिष्ठ कांग्रेस नेता कहा कि उन्हें सरकार और पार्टी दोनों में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। कुछ इसी अंदाज में वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ऑस्कर फर्नाडिस ने कहा कि राहुल हमें नेतृत्व प्रदान करेंगे। वहीं, कंपनी मामलों के मंत्री एम वीरप्पा मोइली ने कहा कि अब राहुल को निर्णायक भूमिका में आना ही होगा। उन्होंने कहा कि राहुल ने पार्टी को काफी समय दिया है और वह देश के युवाओं में काफी उत्साह भर चुके हैं। अब पूरा देश चाहता है कि वह ज्यादा सक्रिय भूमिका में नजर आएं।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि गांधी परिवार ने देश को जितना दिया है, उतना देश से लिया नहीं है। उन्होंने कहा कि इस परिवार ने देश के लिए बड़े बलिदान किए हैं और दो बड़े नेताओं को न्योछावर किया है। केंद्रीय पर्यटन मंत्री सुबोध कांत सहाय ने राहुल गांधी द्वारा संगठन की कमान पूरी तरह संभालने की पैरोकारी की। उन्होंने कहा कि इससे देश भर में कांग्रेस मजबूती से आगे बढ़ेगी। साथ ही 2014 के लोकसभा चुनाव में केवल यूपी में ही नहीं पूरे देश में बेहतर परिणाम आएंगे।
Wednesday, May 23, 2012
किरन चंद मण्डल ने सौंपा विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीपफा
देहरादून। भजपा विधयक किरन मंडल का कई दिनों से चल रहा लुकाछुपी का खेल आखिरकार आज खत्म हो गया। विधयक पद से इस्तीपफा देने के बाद किरन मंडल ने विधनसभा अध्यक्ष गोविन्द सिंह कंुजवाल के आवास पर कहा कि कांग्रेस बंगाली समुदाय को अध्किार देने के साथ-साथ उनकी मांगों पर खरा उतरी है और समुदाय की मांगों के कारण ही उन्होंने विधयक पद से अपनी कुर्बानी दी है।
दोपहर बाद दिल्ली से कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य व भूपेश उपाध्याय के साथ विशेष विमान से देहरादून पहंुचने के बाद शाम करीब चार बजे भाजपा विधयक किरन मंडल ने विधनसभा अध्यक्ष के आवास पर कई नेताओं की मौजूदगी में अपना त्यागपत्रा सौंप दिया। पिछले कई दिनों से भाजपा विधयक को लेकर प्रदेश में राजनैतिक समीकरण बिगड गये थे और भाजपा ने कांग्रेस पर विधयक का अपहरण किये जाने का आरोप लगाते हुए इसे लोकतंत्रा की हत्या तक करार दे दिया था और बीते दिवस राज्यपाल ए कुरैशी से मुलाकात करने के बाद नेता प्रतिपक्ष अजय भटट व प्रदेश अध्यक्ष बिशन सिंह चुपफाल ने जांच की मांग भी की थी लेकिन आज विधयक पद के इस्तीपफा देने के बाद भाजपा आसमंजस की स्थिति में नजर आ रही है। विधयक के इस्तीपफा देने के बाद अब इस सीट पर उप चुनाव किया जाना तय है लेकिन इस सीट से कौन चुनाव लडेगा यह पफैसला अभी नहीं हो पाया है।
..मर जाता तब खुलती साहब की नींद!
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देहरादून। खाकी में चंद अधिकारियों का एक चेहता हेडकांस्टेबल राजधानी में इतना बैखौफ हो रखा है कि उसे हर अपराध माफ है। कितनी बड़ी शर्म की बात है कि जिस हेडकांस्टेबल ने एक युवती के साथ अश्लीलता की और उसकी जांच हुई लेकिन हेडकांस्टेबल का कुछ नहीं बिगड़ा। इसी के चलते वह इतना निडर हो गया कि पैसे वसूलने के लिए वह किसी को भी रास्ते से उठाकर थाने व चैकियों में हैवान की तरह उन्हें पीटने लगा। सवाल उठता है कि हाल में जिस युवक को हेडकांस्टेबल व सिपाही ने कैण्ट कोतवाली के अंदर हैवानों की तरह पीटा, अगर वह थाने में मर जाता तो क्या तक साहब की आंख खुलती, क्योंकि जिस तरह से कैण्ट कोतवाली प्रभारी को इस मामले में क्लीन चिट दी गई, उससे सवाल उठ खड़े हुए है कि जिस कोतवाल की कोतवाली में हैवानियत का नंगा नाच हुआ उस समय आखिरकार कोतवाल कहां सो रहा था? हेडकांस्टेबल की हैवानियत पुलिस कप्तान के सामने आई तो उन्होंने भी हैवान हेडकांस्टेबल व पुलिसकर्मी को लाईन हाजिर कर मामले की जांच उस सीओ के हवाले कर दी जिस पर आरोप है कि वह अक्सर इस हेडकांस्टेबल को बचाने की मुहिम में आगे रहता है।
कैण्ट थाने में चंद दिन पूर्व नींबू वाला निवासी डिंपल को कैण्ट कोतवाली के हेडकांस्टेबल अजय शाह व उसके एक साथी ने हफ्ता न देने पर थाने के अंदर हैवान की तरह पीटा और जब इस मामले में उबाल आया तो हर बार की तरह हेडकांस्टेबल को लाईन हाजिर करने का ड्रामा किया गया। सवाल उठता है कि कुछ समय पूर्व भी यह हेडकांस्टेबल एक व्यक्ति को यातनाएं देने पर लाईन हाजिर हुआ था लेकिन कप्तान का पद संभालते ही मैडम ने हेडकांस्टेबल व लाईन हाजिर हुए पुलिसकर्मियों को बहाल कर उन्हें कुछ भी करने की खुली छुट दे डाली। पुलिस महकमंे में सवाल उठ रहे है कि आखिरकार कुछ अधिकारी क्यों इस हेडकांस्टेबल को पहाड़ी जनपद में तैनात करने से बच रहे है क्योंकि लाईन हाजिर विभाग में एक नौटंकी माना जाता है और चंद समय बाद ही उसे किसी अन्य स्थान पर तैनात कर दिया जाता है। आज इस मामले की शिकायत दिल्ली मानवाधिकार आयोग में भी पीड़ित पक्ष ने कर दी है। यहां यह उल्लेखनीय है कि एक ओर तो पुलिस कप्तान जनता व पुलिस के बीच समनवय कायम करने का दावा कर रही है। वहीं खाकी में कुछ लोग आवाम के साथ हैवानियत कर रहे है।
देहरादून। खाकी में चंद अधिकारियों का एक चेहता हेडकांस्टेबल राजधानी में इतना बैखौफ हो रखा है कि उसे हर अपराध माफ है। कितनी बड़ी शर्म की बात है कि जिस हेडकांस्टेबल ने एक युवती के साथ अश्लीलता की और उसकी जांच हुई लेकिन हेडकांस्टेबल का कुछ नहीं बिगड़ा। इसी के चलते वह इतना निडर हो गया कि पैसे वसूलने के लिए वह किसी को भी रास्ते से उठाकर थाने व चैकियों में हैवान की तरह उन्हें पीटने लगा। सवाल उठता है कि हाल में जिस युवक को हेडकांस्टेबल व सिपाही ने कैण्ट कोतवाली के अंदर हैवानों की तरह पीटा, अगर वह थाने में मर जाता तो क्या तक साहब की आंख खुलती, क्योंकि जिस तरह से कैण्ट कोतवाली प्रभारी को इस मामले में क्लीन चिट दी गई, उससे सवाल उठ खड़े हुए है कि जिस कोतवाल की कोतवाली में हैवानियत का नंगा नाच हुआ उस समय आखिरकार कोतवाल कहां सो रहा था? हेडकांस्टेबल की हैवानियत पुलिस कप्तान के सामने आई तो उन्होंने भी हैवान हेडकांस्टेबल व पुलिसकर्मी को लाईन हाजिर कर मामले की जांच उस सीओ के हवाले कर दी जिस पर आरोप है कि वह अक्सर इस हेडकांस्टेबल को बचाने की मुहिम में आगे रहता है।
कैण्ट थाने में चंद दिन पूर्व नींबू वाला निवासी डिंपल को कैण्ट कोतवाली के हेडकांस्टेबल अजय शाह व उसके एक साथी ने हफ्ता न देने पर थाने के अंदर हैवान की तरह पीटा और जब इस मामले में उबाल आया तो हर बार की तरह हेडकांस्टेबल को लाईन हाजिर करने का ड्रामा किया गया। सवाल उठता है कि कुछ समय पूर्व भी यह हेडकांस्टेबल एक व्यक्ति को यातनाएं देने पर लाईन हाजिर हुआ था लेकिन कप्तान का पद संभालते ही मैडम ने हेडकांस्टेबल व लाईन हाजिर हुए पुलिसकर्मियों को बहाल कर उन्हें कुछ भी करने की खुली छुट दे डाली। पुलिस महकमंे में सवाल उठ रहे है कि आखिरकार कुछ अधिकारी क्यों इस हेडकांस्टेबल को पहाड़ी जनपद में तैनात करने से बच रहे है क्योंकि लाईन हाजिर विभाग में एक नौटंकी माना जाता है और चंद समय बाद ही उसे किसी अन्य स्थान पर तैनात कर दिया जाता है। आज इस मामले की शिकायत दिल्ली मानवाधिकार आयोग में भी पीड़ित पक्ष ने कर दी है। यहां यह उल्लेखनीय है कि एक ओर तो पुलिस कप्तान जनता व पुलिस के बीच समनवय कायम करने का दावा कर रही है। वहीं खाकी में कुछ लोग आवाम के साथ हैवानियत कर रहे है।
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